लखीमपुर में धर्म, भक्ति और संस्कृति का अभूतपूर्व संगम बना श्री श्री शिवपरिवार प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव
लखीमपुर की पुण्यभूमि साक्षात शिवधाम में परिवर्तित हो गई, जब वासुदेव कल्याण ट्रस्ट मंदिर प्रांगण में माहेश्वरी महिला संगठन, उत्तर लखीमपुर शाखा के सौजन्य से आयोजित श्री श्री शिवपरिवार प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 3 से 7 अगस्त तक धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक एकता का अनुपम उदाहरण बनकर संपन्न हुआ। यह आयोजन मात्र एक धार्मिक क्रिया नहीं था, अपितु संस्कृति, श्रद्धा और सामाजिक समरसता का एक ऐसा उत्सव बना, जिसमें नगरवासी आत्मिक आस्था के साथ जुड़ते चले गए। माहेश्वरी महिला संगठन की प्रेरणा, संगठनात्मक कुशलता और समाज की सामूहिक सहभागिता ने इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया। 3 अगस्त की सुबह श्री श्री ठाकुरबाड़ी मंदिर से प्रारंभ हुई भव्य कलश यात्रा ने जैसे समूचे नगर को शिवमय कर दिया। पारंपरिक वेशभूषा में सजी मातृशक्ति और भक्तों का उल्लासमय जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों से होता हुआ वासुदेव कल्याण ट्रस्ट मंदिर पहुंचा, जहां आचार्य केदार जी शास्त्री (छोटू जी), उनके साथ नारायण जी जोशी, जैतराम जी मिश्रा, ओम जी पंडितजी, धनराज जी पंडितजी और पंडितजी लोकेश जी दीक्षित के मुखारबिंद से वैदिक मंत्रोच्चार और आरती के साथ कलशों का विधिवत पूजन सम्पन्न हुआ। इस दिव्य अनुष्ठान के प्रतिदिन सभी विद्वान पंडितों द्वारा प्रात: 8 बजे से पंचांग पूजन, जलाधिवास, अन्नाधिवास, शैयाधिवास, फलाधिवास, घृताधिवास जैसे विभिन्न आध्यात्मिक विधियों का सविस्तार आयोजन हुआ, जिसमें शास्त्रोक्त विधि से भगवान शिव, माता पार्वती, गणेशजी, कार्तिकेय और नंदीजी की आराधना की गई। 6 अगस्त को विशेष रूप से महायज्ञ एवं हवन सम्पन्न हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आहुतियाँ अर्पित कर अपने जीवन को पुण्यमय बनाया। आरती और प्रसाद वितरण के साथ प्रत्येक दिन का समापन श्रद्धा और संतोष की भावभूमि पर होता रहा। 7 अगस्त को कार्यक्रम की पूर्णाहुति के दिन प्रात: काल से ही मूसलधार वर्षा आरंभ हो गई, जिससे प्रस्तावित नगर भ्रमण पदयात्रा को परिवर्तन कर वाहन यात्रा के रूप में सम्पन्न किया गया। परंतु वर्षा बाधा नहीं बनी, आस्था की अभिव्यक्ति फिर भी संपूर्णता में प्रकट हुई। भगवान शिव परिवार की सुसज्जित मूर्तियों को आकर्षक रूप से सजाए गए वाहनों में नगर भ्रमण पर ले जाया गया। इसके पश्चात मूर्ति प्रतिष्ठा, शृंगार, नेत्र मिलन तथा प्राण प्रतिष्ठा विधि पूरी गरिमा और श्रद्धा से संपन्न हुई। महाआरती के साथ समापन की वह घड़ी जैसे शिवभक्ति के एक विशाल पर्व का सार बनकर उपस्थित हुई। हर रात्रि 8 से 10 बजे तक आयोजित भजन संध्या में स्थानीय कलाकारों ने भावपूर्ण प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भक्ति के सागर में गोते लगवाए। अंतिम रात्रि को विशेष रूप से जोरहाट के आमंत्रित भजन गायक कलाकार मुकेश दाधीच और कमल दाधीच द्वारा प्रस्तुत की गई प्रस्तुति ने जैसे वासुदेव मंदिर परिसर को शिवभक्ति की सुरमयी गूंज से गुंजायमान कर दिया। इस विराट आयोजन की प्रेरणास्रोत रहीं माहेश्वरी महिला संगठन की अध्यक्षा श्रीमती किरण देवी बजाज, जिनके नेतृत्व में कार्यक्रम संयोजिका ममता गगड और रंजू मूंधड़ा के कुशल नेतृत्व में संगठन की सभी पदाधिकारी, कार्यकर्ता बहनें, युवा सहयोगी, वरिष्ठजन और समाजबंधु पूरे समर्पण के साथ इस आयोजन में रत रहे। कलश यात्रा से लेकर मूर्ति प्रतिष्ठा तक, पूजन विधियों से लेकर भजन संध्याओं तक—हर गतिविधि में संयोजन, अनुशासन, समयबद्धता और सौंदर्य का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम संयोजिका ममता गगड और रंजू मूंधड़ा ने सभी को प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से इस अनुष्ठान में सहयोग करने वालों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव न केवल धार्मिक परंपराओं के निर्वहन का माध्यम बना, बल्कि उसने सांस्कृतिक चेतना, पारिवारिक समरसता और सामाजिक एकजुटता को भी नई ऊर्जा प्रदान की। वृद्ध, युवा, मातृशक्ति और बालक—सभी की सक्रिय उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि समाज में संस्कारों और श्रद्धा की जड़ें गहरी हैं। राजेश राठी की रिपोर्ट
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