अंटार्कटिका मैराथन-2025 में पीयूष जाजू ने तय समय से पांच मिनट पहले पूरी कर बनाया कीर्तिमान
कोलकाता निवासी पर्यावरण प्रेमी पीयूष जाजू ने 14 मार्च को आयोजित अंटार्कटिका मैराथन को सफलतापूर्वक पूरा कर कीर्तिमान बनाया है। 42 किलोमीटर लंबी मैराथन को जाजू ने 6 घंटे 25 मिनट में पूरा कर लिया। जबकि इसका निर्धारित समय 6 घंटे 30 मिनट था। पर्यावरण रक्षा का संदेश देने वाली अंटार्कटिका मैराथन बड़ी ही जोखिम भरी होती है। इसके पूरे रास्ते में बर्फ जमी रहती है। मौसम का कोई भरोसा नहीं, आंधी और शीत हवाएं कभी भी प्रतिभागियों का रास्ता रोकने आ जाती हैं। इसका आयोजन रनबुक द्वारा किया जाता है।
इस रोमांचक जोखिम भरी मैराथन को पूरा करने वाले पीयूष जाजू बताते हैं कि मैराथन स्थल पर -20 डिग्री सेल्सियस का तापमान रहता है। यह आयोजन 700 मीटर की ऊंचाई पर होता है। जाजू बताते हैं कि यह मैराथन कड़ाके की सर्दी से ना सिर्फ लडऩे का हौसला देती है, बल्कि मुश्किल से मुश्किल हालात की स्थिति का सामना करने की हिम्मत देती है। वह कहते हैं कि प्रतिभागियों को इसके लिए काफी तैयारी करनी पड़ती है।
तीस-चालीस किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज बर्फीली आंधी कभी भी आ सकती है। इसके अलावा रास्ते में कीचड़, बर्फ से भी सामना करना पड़ता है। कुल मिलाकर यहां मौसम का कोई भरोसा नहीं है। जाजू कहते हैं कि अंटार्कटिका मैराथन वास्तव में ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरूकता लाने की और एक प्रयास है। वह बताते हैं कि उन्हें शुरू से ही एडवेंचर में रुचि रही है। दो वर्ष पहले भी वह इसमें हिस्सा ले चुके हैं। पीयूष की पत्नी श्वेता जाजू मैराथन के दौरान बराबर सम्पर्क में रही।
मैराथन के आयोजकों के अनुसार प्रत्येक प्रतिभागी को मौसम की अनिश्चितता के बारे में बता दिया जाता है। पिछली मैराथन के फोटोग्राफ भी उनको दिखाए जाते हैं, ताकि वह अंदाजा लगा सके कि तैयारी किस तरह करनी है। उनका कहना है कि यह मैराथन दुनिया की सबसे जोखिम भरी अनोखी मैराथन है। इसमें कई देशों के लोग हिस्सा लेते हैं। उल्लेखनीय है कि पीयूष प्रसिद्ध उद्योगपति व समाजसेवी जयपुर निवासी स्व. श्री जगन्नाथ जाजू के सुपौत्र हैं तथा औनर्जी सोलर कंपनी के संस्थापक हैं।
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