रांची समाज ने दीपावली के बाद परिवार मिलन की परंपरा को पुर्नस्थापित कर रचा एक नया इतिहास

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कुछ वर्षों पूर्व तक दीपावली के बाद हम अपने रिश्तेदारों एवं परिचितों के घर जाकर दीपावली की राम-राम करते थे और बुजुर्गों का आशीर्वाद भी प्राप्त करते थे। यह एक बेहद सुंदर सामाजिक परंपरा थी, जो समय के साथ लगभग विलुप्त हो चुकी थी। संस्थाओं द्वारा दीपावली मिलन का आयोजन तो किया जाता है, परंतु वह केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया है। रांची समाज के सदस्यों ने अपने सामूहिक प्रयास से शस्त्र पूजन के कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया था। इसी तरह समाज की पुरानी, सुंदर परंपराओं की पुर्नस्थापना का दूसरा इतिहास अब रांची माहेश्वरी समाज ने रचा है।

सम्पूर्ण भारत में विभिन्न संस्थाएं दीपावली मिलन का आयोजन करती हैं, परंतु कहीं भी दीपावली के बाद घर-घर जाकर परिवार मिलन का कार्यक्रम सामाजिक बैनर के तहत आयोजित नहीं होता है। रांची माहेश्वरी सभा के सदस्यों ने यह निर्णय लिया कि इस वर्ष दीपावली के बाद समाज के सदस्य (संभव हो तो सपत्नीक) कम से कम दो परिवारों से जाकर दीपावली की राम-राम करेंगे और चार पीस मिठाई भेंट कर इस प्रथा को पुनर्जीवित करने का प्रयास करेंगे।

यह प्रयास पहली बार रांची माहेश्वरी समाज के द्वारा समाज के सदस्यों के सहयोग से किया गया। सभी सदस्यों से अनुरोध किया गया कि परिवार मिलन के दौरान ली गई एक तस्वीर समाज के पोर्टल पर अपलोड करें। समाज के सभी वर्गों ने इस प्रयास में उत्साहपूर्वक भाग लिया। 1 नवंबर से 10 नवंबर तक चले इस कार्यक्रम में रांची माहेश्वरी समाज के 325 परिवारों में से लगभग 160 परिवारों में यह मिलन कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रथम प्रयास के रूप में यह एक रिकॉर्ड है। साथ ही, समाज के पदाधिकारियों ने यह भी निर्णय लिया कि होली के बाद, दीपावली तक जिन परिवारों में दु:खद घटना हुई है, वहां समाज के पदाधिकारी चार पीस मिठाई लेकर स्वयं जाएंगे। इस क्रम में समाज के चार परिवारों में पदाधिकारी गण गए। दीपावली मिलन के बाद परिवार मिलन की परंपरा को पुर्नस्थापित करने के इस प्रयास में सम्पूर्ण समाज का सहयोग सराहनीय है।
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