रांची समाज ने दीपावली के बाद परिवार मिलन की परंपरा को पुर्नस्थापित कर रचा एक नया इतिहास
अब की दिवाली, पहले वाली डिजिटल नहीं, दिलवाली
कुछ वर्षों पूर्व तक दीपावली के बाद हम अपने रिश्तेदारों एवं परिचितों के घर जाकर दीपावली की राम-राम करते थे और बुजुर्गों का आशीर्वाद भी प्राप्त करते थे। यह एक बेहद सुंदर सामाजिक परंपरा थी, जो समय के साथ लगभग विलुप्त हो चुकी थी। संस्थाओं द्वारा दीपावली मिलन का आयोजन तो किया जाता है, परंतु वह केवल एक औपचारिकता बनकर रह गया है। रांची समाज के सदस्यों ने अपने सामूहिक प्रयास से शस्त्र पूजन के कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित कर एक उदाहरण प्रस्तुत किया था। इसी तरह समाज की पुरानी, सुंदर परंपराओं की पुर्नस्थापना का दूसरा इतिहास अब रांची माहेश्वरी समाज ने रचा है।
सम्पूर्ण भारत में विभिन्न संस्थाएं दीपावली मिलन का आयोजन करती हैं, परंतु कहीं भी दीपावली के बाद घर-घर जाकर परिवार मिलन का कार्यक्रम सामाजिक बैनर के तहत आयोजित नहीं होता है। रांची माहेश्वरी सभा के सदस्यों ने यह निर्णय लिया कि इस वर्ष दीपावली के बाद समाज के सदस्य (संभव हो तो सपत्नीक) कम से कम दो परिवारों से जाकर दीपावली की राम-राम करेंगे और चार पीस मिठाई भेंट कर इस प्रथा को पुनर्जीवित करने का प्रयास करेंगे।
Latest News