महेश नवमी के उपलक्ष में राष्ट्रीय महिला संगठन द्वारा आयोजित साड़ी वाकेथान 8 जून को भव्यता पूर्वक सफलतापूर्वक संपन्न


हमारी संस्कृति हमारा अभिमान,
साड़ी है भारतीयता की पहचान।
संस्कृति संरक्षण का लिया प्रण,
साड़ी वॉकेथॉन किया धूमधाम से सम्पन्न।।
महेश नवमी पर्व की उत्सव श्रृंखला का आगाज अखिल भारत वर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन द्वारा पूरे भारतवर्ष में अष्टसिद्धा एवं संस्कृति सिद्धा समिति के माध्यम से किए गये प्रोजेक्ट साड़ी वाकेथान के साथ बहुत जोरशोर से हुआ। राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजू बांगड एवं महामंत्री ज्योति राठी ने बताया की उनके आह्वान पर संपूर्ण भारत भारतवर्ष तथा नेपाल में सुबह एक साथ एक समय पर सूर्य की पहली किरण के साथ ही महिलाएं एकत्रित होकर साड़ी वॉक के लिए निकल पड़ीं। मॉर्निंग वॉक के रूप में मंदिर पूजन, सेवा प्रतिभा सम्मान से सजा यह बहुउद्देशीय कार्यक्रम सबके मन को लुभाने वाला रहा जिसने इतर समाज में भी अपनी खुशबू फैलाई तथा एक सुंदर संदेश साड़ी हमारी भारतीय सांस्कृतिक वेशभूषा है के महत्व को समझाया। सुबह 6.30 से 10.30 के मध्य साड़ी वॉकथॉन का शुभारंभ प्रशासनिक अतिथियों द्वारा फ्लेग दिखा कर किया गया। सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और साड़ी हमारा अभिमान के नारे लगाए। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष किरण लढ्ढा एवं संगठन मंत्री ममता मोदानी ने बताया की पीली साड़ी, लाल दुपट्टा, माथे पर लाल बिंदी तथा हाथ में कलावा बांधे मनमोहक श्रृंगार के साथ सजी-संवरी भारतीय गौरव का मान बढ़ाती हमारे संगठन की टॉप टू बॉटम बहनों का जोश और हर्षोल्लास देखते ही बन रहा था। पुष्पवर्षा तथा ढ़ोल नगाड़े की थाप पर नारी शक्ति द्वारा गीत गाते, हाथ में बैनर लिए, पंक्तिबद्ध शालीनता से एक साथ चलते हुए भव्य साड़ी वाकेथान का आयोजन किया गया। यह एक अविस्मरणीय दिवस रहा।

बहनों द्वारा विभिन्न किरदारों जैसे - झांसी की रानी लक्ष्मी बाई, सुषमा स्वराज, प्रतिभा पाटिल, अहिल्या बाई, लता मंगेशकर, निर्मला सीतारमण, जयललिता, सरोजिनी नायडू, इन्दिरा गांधी, रानी पद्मावती, उषा उत्थुप, स्मृति ईरानी तथा सुधा चंद्रन इत्यादि में सजकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया एवं नारी शक्ति का सम्मान व्यक्त किया गया। अष्ट सिद्धा समिति की प्रदर्शक मधु बाहेती एवं प्रभारी डॉ. नम्रता बियाणी ने कहा इस कार्यक्रम में सभी जगह कार्यशील प्रोफेशनल बहनों को विशेष रूप से आमंत्रित कर उनका सम्मान किया गया। इस तरह से उन्हें समाज से जोडऩे की एक पहल की गई। बड़े जोर-शोर से इसका आयोजन किया गया मधुर लयबद्ध धुन पर, कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस वाकेथान को ढोल-नगाड़ों और बैंडबाजों के साथ निकला और अपने निकटतम मंदिरों तक ले जाया गया।
संस्कृति सिद्धा समिति की प्रदर्शक निशा लढ्ढा एवं प्रभारी प्रेमा झंवर ने बताया की सभी जगह ही मंदिरों में बोर्ड का अनावरण किया गया। जिसमें महिलाओं को मंदिरों में, धार्मिक स्थलों एवं समाज के कार्यक्रम में शालीन वस्त्र पहनकर आने का आह्वान किया गया। वहां पर साड़ी की महिमा का वर्णन किया गया और सभी बहनों ने एक साथ शपथ भी ली कि वो अपनी साड़ी पहनने की प्रथा को गर्व एवं सम्मान प्रदान कर सांस्कृतिक धरोहर को संजोएंगे तथा अगली पीढ़ी को प्रोत्साहित कर इस विरासत को आगे पहुंचाने की भरसक कोशिश करेंगे। मन्दिर के प्रांगण में पहुंचकर सभी ने सामूहिक पूजा-अर्चना की। तत्पश्चात पधारे मुख्य अतिथियों द्वारा राष्ट्रीय संगठन से प्रेषित महत्त्वपूर्ण संदेश लिखित बोर्ड का अनावरण किया गया। संगठन पदाधिकारी, समाज के प्रतिष्ठित गणमान्य बुद्धिजीवी जन तथा आमंत्रित प्रशासनिक अधिकारियों सहित सभी ने अपने वक्तव्य में कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
इस कार्यक्रम के अंत में सेवा कार्य छाछ/शरबत वितरण, वृक्षारोपण आदि भी सभी संगठनों द्वारा किया गया। साड़ी वॉकथॉन का उद्देश्य ना केवल साड़ी की महत्ता को दर्शाना था अपितु भारतीय संस्कृति एवं विलुप्त होती परपराओं को पुनर्जीवित कर अपनी आन-बान-शानयुक्त मर्यादापूर्ण परिधान साड़ी को आधुनिक परिवेश में पहचान दिलाना भी था। इस आयोजन के जरिए जन-जन तक यह सन्देश पहुंचाया गया कि
साड़ी नारी का श्रृंगार हैं, सौंदर्य का आधार हैं,
साड़ी भारतीय नारी की अद्वितीय पहचान है।
अध्यात्मिक व सात्विक परिधान हैं तथा अपनी संस्कृति का सम्मान है।


सभी पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों के आह्वान पर स्थानीय, जिला एवं प्रदेश महिला संगठनो ने जोश एवं उत्साह से इस कार्यक्रम को किया गया। अखिल भारत वर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन के द्वारा किए गए इस अभिनव प्रयास की सराहना भी की गई। समाज के बंधुओं द्वारा इस अवसर पर कई जगह कार्यक्रम में महिलाओं का पुष्पों से स्वागत किया गया। लस्सी, आइसक्रीम, शरबत, छाछ, जलपान तथा प्रसाद वितरण से इस कार्यक्रम का समापन किया गया। यह साड़ी वॉकेथान एक अभूतपूर्व सफल कार्यक्रम रहा। इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं ने अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति गौरव व्यक्त किया और समाज में सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश दिया। इस कार्यक्रम में अष्ट सिद्धा समिति के सभी सहप्रभारियों अनुजा काबरा, रितु मूंदड़ा, माधुरी मोदी, डॉ. उर्वशी साबू एवं शोभा भूतड़ा का विशेष योगदान रहा। 


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