हेरिटेज हवेलियां हमारे पुरखों की विरासत - प्रोफेसर डॉ.बिनानी
विगत दिनों बीकानेर के अंदरूनी क्षेत्र की सौ वर्षों से अधिक की कुछ हवेलियों का बच्चों व युवाओं को एक दिवसीय भ्रमण करवाया गया। इस हेरिटेज हवेली दर्शन यात्रा के भ्रमण के माध्यम से बच्चों व युवाओं ने बीकानेर की प्राचीन स्थापत्य कला,दुलमेरा के लाल पत्थर व मकराने से निर्मित हवेलियों की विरासत, अप्रतिम नक्काशी, सभ्यता व संस्कृति को समझाया गया। हेरिटेज यात्रा में शामिल बच्चों व युवाओं ने भी अत्यंत उत्सुकता से इसे समझने की कोशिश की। इस हेरिटेज हवेली भ्रमण के संयोजक राम कुमार मूंधड़ा ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि बीकानेर शहर के बाहरी क्षेत्र एवं प्रवासी, जैसे बंगला नगर, ईदगाह बारी, जय नारायण व्यास कॉलोनी, पूगल फांटा आदि और अहमदाबाद, गुवाहाटी, पुणे आदि में प्रवास करने वाले करीब 15 युवा व बच्चे इस हेरिटेज हवेली दर्शन यात्रा में शामिल थे।
संयोजक राम कुमार मूंधड़ा ने बताया कि इस हेरिटेज हवेली भ्रमण की उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि इसमें शामिल अधिकांश बच्चे व युवा 8 से 18 वर्ष की आयु के मध्य के थे। इस हेरिटेज हवेली भ्रमण यात्रा को कोठारी अस्पताल, बंगला नगर से मल्टी स्किल डेवलपमेंट एसोसिएशन के सीईओ एवं एक्स-प्रिंसिपल चिंतक व लेखक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी के सानिध्य में रवाना किया गया। प्रोफेसर डॉ.बिनानी ने बताया कि यह हेरिटेज हवेली यात्रा कोठारी अस्पताल रोड़ से, जस्सुसर गेट, स्वतंत्रता सेनानी मूलचंद पारीक सर्कल, बिनानी निवास, हनुमान मन्दिर, बी के स्कूल, डागा चौक, बिनानी चौक, लखोटिया चौक होते हुए लखोटिया नरसिंह मन्दिर के पीछे चौथानी ओझा गली में पहुंची। प्रोफेसर डॉ.बिनानी ने इस हेरिटेज हवेली यात्रा के मार्ग में आने वाले कोठारी हॉस्पिटल के संस्थापक जी. डी. कोठारी के योगदान, जस्सुसर गेट की बनावट, बिनानी निवास, बिनानी अस्पताल आदि के मालिक सेठ भवानी दास जी बिनानी,उनके भाई एवं बिनानी कॉलेज की भूमि उपलब्ध कराने वाले सेठ गोवर्धन दास जी बिनानी सहित उनके परिवार के सामाजिक कल्याण कार्यों व योगदान के बारे में बच्चों व युवाओं को जानकारी प्रदान की ।
इसके साथ साथ प्रोफेसर डॉ.बिनानी ने हेरिटेज हवेली यात्रा भ्रमण के मार्ग में आने वाले हनुमान मन्दिर व बी के स्कूल के इतिहास, प्रतिष्ठा एवं लोकप्रियता, सेठ कस्तुर चंद डागा, सेठ रामनाथ डागा सहित इनके परिवार का इतिहास, इनका तत्कालीन बीकानेर राजघराने से संबंध, इनकी दुलमेरा के लाल पत्थर से निर्मित हवेलियों की विशेषताओं, बिनानी चौक, लखोटिया चौक, की हवेलियों की विशेषताओं, सेला महाराज की देशी घी की मिठाइयों एवं विभिन्न प्रकार की भुजिया व नमकीनों आदि के बारे में विस्तृत जानकारी दी ।हेरिटेज हवेली भ्रमण में शामिल सभी बच्चों व युवाओं को छोटी छोटी संकडी गलियों में से होते हुए लखोटिया नरसिंह मन्दिर के पीछे स्थित सेठ मानिक लाल बिनानी, सेठ आशाराम बिनानी, सेठ चंपालाल बिनानी आदि की हवेलियों के अंदर ले जाया गया।
प्रोफेसर डॉ.बिनानी ने सभी बच्चों व युवाओं को तीन से चार मंजिल ऊंची हवेलियों के अंदरूनी भागों के भ्रमण के दौरान हवेलियों में बने भव्य आंगन, भीति चित्र, हिन्दू देवी-देवताओं की हस्त शिल्प से चित्रित, गढी गयी छवि या उनकी प्रतिमाएं,रंगीन कांचों से बनी रंगशालाएं, धन सम्पदा रखने की भारी भरकम तिजोरियां, भव्य नक्काशी, जाली- झरोखे, लकड़ी की छतें व उन पर चटक रंगों में किये गए बेलबूटेदार चित्रित नमूने , सुनहरी कोरनी कला, पत्थर के खम्बे व उन पर की गई हस्त शिल्प कलाकारी, पुराने लकड़ी के दरवाजों पर हस्त शिल्प से की गई नक्काशी, हवेलियों में बने नक्काशीयुक्त भव्य प्रवेश द्वार, नक्काशीदार छज्जों, झरोखों व जालियों, विशाल टेरेस उनमें प्रवेश हेतु संकरी सीढ़ियों, जमीनी स्तर से नीचे के तहखानों, दीवारों पर बनाये आलों आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी । इस अवसर पर प्रोफेसर डॉ.बिनानी ने बच्चों व युवाओं को कहा कि ये सभी हेरिटेज हवेलियां हमारे पुरखों की विरासत है। इन्हें संभाल कर रखना हम सभी, विशेषतः बच्चों व युवाओं की जिम्मेदारी है।
इस दौरान मक्खन लाल, कमल बिनानी, डॉ. राकेश कुमार, राज कुमार बिनानी, शिक्षाविद् सरिता बिनानी ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इस हेरिटेज हवेली दर्शन यात्रा में श्रीमती जय श्री, राम मूंधड़ा, श्रीमती गायत्री देवी, हर्षित, दिशा, अभिषेक, एकता, छोटू, पावनी, गुंजन सहित अनेक युवक- युवतियां एवं बच्चे- बच्चियां आदि शामिल थे। इस एक दिवसीय हेरिटेज हवेली दर्शन भ्रमण से युवा व बच्चे खूब रोमांचित व अचंभित हुए । वे सभी चूने व मुड़ से बनी परंपरागत छतों व दीवारों पर जमकर नाचे l छोटे बच्चों सहित,सभी ने, हवेली में बीकानेर की विशेषतः मशहूर बाजरे की रोटी व पंच भेल ( फली, फोफलिया, खेलरा, काचरी, कुम्बटिए) की सब्जी, गुड व बुरे तथा बाजरी के आटे की राबडी के साथ, स्वादिष्ट भोजन करने का आनंद लिया। इस हेरिटेज हवेली दर्शन यात्रा में भोजन के समय बीकानेरी व्यंजनों की खुशबू से पूरा माहौल महक उठा। अंत में एक हवेली में निवास करने वाली उसके मालिकों की करीब अस्सी वर्षीय वृद्धा वारिस श्रीमती पार्वती देवी बिनानी से सभी ने आशीर्वाद लिया।
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