13 वे सत्र की राष्ट्रीय अध्यक्षा एवं निवर्तमान राष्ट्रीय महामन्त्री को मतदान अधिकार से वंचित करने पर उठे सवाल

आगामी 20 सितम्बर को होने वाले अखिल भारतीय माहेश्वरी महिला संगठन के चुनाव को लेकर अखिल  भारतीय  माहेश्वरी  महिला संगठन  के 13 वे सत्र की राष्ट्रीय अध्यक्षा एवं  निवर्तमान  राष्ट्रीय महामन्त्री श्रीमती मंजू जी बांगड़ को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में संगठन के पदाधिकारियों एवं श्रीमती बांगड़ की ओर से मतदान का अधिकार दिए जाने का अनुरोध किया गया है।
श्रीमती बांगड़ के अनुसार, संगठन के विधान में सभी पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों को मतदान का अधिकार प्राप्त है। इसके बावजूद चुनाव अधिकारी श्री सतीश जी चरखा द्वारा उन्हें मतदान की अनुमति नहीं दी गई। चुनाव अधिकारी की ओर से यह कारण बताया गया कि उनके प्रदेश सभा का गठन नहीं हुआ है, इसलिए उन्हें मतदान का अधिकार नहीं है।
इस पर श्रीमती बांगड़ की ओर से यह तर्क दिया गया है कि उनका प्रदेश सभा के गठन से कोई संबंध नहीं है और वे संगठन की निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनका कहना है कि यदि विधान में पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों को मतदान का अधिकार प्रदान किया गया है, तो उसी प्रावधान के आधार पर उन्हें भी मतदान का अवसर मिलना चाहिए।
श्रीमती बांगड़ द्वारा इस संबंध में बार-बार निवेदन किए जाने के बावजूद समाधान नहीं होने पर उन्होंने इस विषय में संगठन के पदाधिकारियों से हस्तक्षेप की अपेक्षा की है। उनका कहना है कि एक ओर समाज में महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के अधिकारों की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर एक महिला पदाधिकारी के अधिकार को लेकर ऐसी स्थिति उत्पन्न होना विचारणीय है।
इस मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न सत्र शुल्क को लेकर भी उठाया गया है। यदि श्रीमती बांगड़ को मतदान का अधिकार नहीं है, तो उनसे सत्र का शुल्क किस आधार पर लिया गया—यह भी स्पष्ट किया जाना अपेक्षित है। शुल्क स्वीकार किए जाने के बाद मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।
श्रीमती बांगड़ एवं उनके समर्थकों ने अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के सभी संबंधित पदाधिकारियों से आग्रह किया है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए विधान के प्रावधानों की स्पष्ट व्याख्या की जाए तथा यदि नियमों के अनुसार मतदान का अधिकार बनता है, तो उन्हें तत्काल मतदान का अवसर प्रदान किया जाए। साथ ही चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
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