माहेश्वरी मंडल वर्धा की मारकंडेश्वर धाम तीर्थयात्रा संपन्न

धार्मिक यात्राएं केवल तीर्थ-दर्शन तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वे विभिन्न संस्कृतियों के लोगों से मेल-मिलाप, आपसी समन्वय एवं सामाजिक एकता का माध्यम भी बनती हैं। मन को ताजगी प्रदान करने, तनावमुक्त जीवन जीने तथा समाजबंधुओं को संगठित करने के लिए समय-समय पर ऐसी यात्राओं का आयोजन आवश्यक है। यह विचार माहेश्वरी मंडल वर्धा के अध्यक्ष श्री नंदकिशोर भूतड़ा ने व्यक्त किए।

माहेश्वरी मंडल, वर्धा के तत्वावधान में विदर्भ के प्रसिद्ध तीर्थ श्री मारकंडेश्वर धाम की एक दिवसीय धार्मिक यात्रा का सफल आयोजन किया गया। प्रात: 5:30 बजे प्रारंभ हुई यह यात्रा देर रात्रि 2 बजे संपन्न हुई। यात्रा में वर्धा माहेश्वरी समाज के 150 से अधिक श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। विशेष रूप से बड़ी संख्या में युवाओं एवं महिलाओं की उपस्थिति आकर्षण का केंद्र रही, जो वर्तमान पीढ़ी में धार्मिक एवं सामाजिक संस्कारों के प्रति बढ़ती आस्था का प्रतीक बनी।

यात्रा को सुचारू एवं सुरक्षित बनाने के लिए आयोजन समिति द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई थीं। तीन बसों के साथ पायलट वाहन की व्यवस्था की गई। यात्रियों के लिए समयानुसार अल्पाहार, भोजन, विश्राम एवं सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए। सावन के मौसम में भी मौसम अनुकूल रहने से यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने चितपल्ली स्थित हनुमान मंदिर, चंद्रपुर स्थित महाकाली मंदिर, चंद्रपुर के श्री बालाजी मंदिर तथा मुख्य तीर्थ श्री मारकंडेश्वर धाम में पूजा-अर्चना कर दर्शन एवं पुण्य लाभ प्राप्त किया। वैनगंगा नदी के तट पर स्थित एवं 'लघु काशीÓ के नाम से प्रसिद्ध मारकंडेश्वर धाम में भजन-कीर्तन से वातावरण अत्यंत भक्तिमय हो गया।

गडचिरोली से पधारे श्री नंदकिशोर काबरा ने मारकंडेश्वर धाम में यात्रियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं। यात्रा के समापन पर विदर्भ प्रादेशिक माहेश्वरी संगठन के निर्वर्तमान सीए श्री दामोदर सारडा के फार्म हाउस पर श्रद्धालुओं के लिए रात्रि भोजन की व्यवस्था की गई। श्री दामोदर सारडा एवं श्री मुकुंद गांधी के आत्मीय आतिथ्य की सभी यात्रियों ने सराहना की। यात्रा के दौरान भोजन व्यवस्था का दायित्व श्री गोविंद राठी ने संभाला।

सहयोग प्रदान करने वाले सभी सहयोगियों का माहेश्वरी मंडल ट्रस्ट के श्री दामोदर सारडा, समाज के ज्येष्ठ सदस्य श्री नारायण तापडिय़ा, श्री वल्लभ राठी आदि द्वारा गरिमापूर्ण सम्मान किया गया। इस अवसर पर श्री नंदकिशोर काबरा एवं श्री दामोदर सारडा ने भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग प्रदान करने की भावना व्यक्त की। मंडल के सचिव श्री हरीश गांधी ने सभी सहयोगियों, यात्रियों एवं आयोजन से जुड़े कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

मंडल समन्वयक श्री राजकुमार जाजू ने कहा कि धार्मिक यात्राएं केवल दर्शन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समाज को एकजुट करती हैं, पारिवारिक एवं सामाजिक रिश्तों को प्रगाढ़ बनाती हैं तथा नई पीढ़ी को संस्कारों से जोडऩे का कार्य करती हैं।

उन्होंने कहा कि तीर्थ केवल पत्थर नहीं होते, वहां हमारे पूर्वजों की आस्था और परंपराओं की अनुभूति होती है। तीर्थ यात्रा से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसी यात्राएं समाजबंधुओं की छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने के साथ-साथ उन्हें अपनी संस्कृति और जड़ों से जोडऩे का भी महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं।

यात्रा को सुखद एवं अविस्मरणीय बनाने में मंडल के उपाध्यक्ष श्याम राठी, सहसचिव पंकज सोमानी, नवयुवक मंडल के सचिव अमित लदड, महिला मंडल की अध्यक्षा सुनीता राठी, सचिव छाया पसारी, नवयुवती मंडल की सचिव विशाखा टावरी, अनुराग राठी, अनिल केला, सुशील भूतड़ा, हेमंत भूतड़ा, ओमप्रकाश पसारी, गौरव हरकुटिया, आनंद भूतड़ा, मोहन गांधी, संजय गांधी, अलका राठी, नीता राठी, ललिता राठी, नेहा भूतड़ा, सोनल गांधी, हर्षा टावरी सहित संगठन के अन्य पदाधिकारियों एवं समाजबंधुओं का विशेष योगदान रहा।

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