वर्धा के राजकुमार जाजू को राष्ट्रीय सम्मान

जब शब्द समाज का दर्पण बनते हैं और लेखनी चिंतन की मशाल, तब सम्मान स्वयं चलकर आता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्धा के माहेश्वरी मंडल के समन्वयक एवं रोटरी क्लब गांधी सिटी के जनसंपर्क अधिकारी राजकुमार जाजू ने एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर वर्धा का गौरव बढ़ाया।

श्री माहेश्वरी सेवा मंच परिवार एवं माहेश्वरी महिला मंडल, अमरावती द्वारा विदर्भ प्रादेशिक माहेश्वरी युवा संगठन के पूर्व अध्यक्ष स्व. शशिकांत जाजू की स्मृति में आयोजित अखिल भारतीय निबंध स्पर्धा का भव्य पुरस्कार वितरण समारोह राठी एज्युकेशन हब, अमरावती में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विदर्भ प्रादेशिक माहेश्वरी संगठन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्राध्यापक रमन हेडा, अकोला एवं माहेश्वरी मंडल अमरावती के अध्यक्ष श्री सुरेश साबू थे। इस अवसर पर निर्णायक मंडल के सदस्यों ने भी प्रसंगानुरूप अपने विचार व्यक्त किए।

स्व. शशिकांत जाजू की धर्मपत्नी श्रीमती आरतीदेवी जाजू ने स्वर्गीय शशिकांतजी के कार्यों का स्मरण करते हुए उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए आर्थिक सहयोग देने का संकल्प दोहराया तथा सेवा मंच द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।

मंच पर सेवा मंच के अध्यक्ष श्री सुनील मंत्री, सचिव श्री संजय भुतड़ा, स्व. शशिकांत जाजू की धर्मपत्नी श्रीमती आरतीदेवी जाजू, महिला मंडल की अध्यक्षा सौ. वंदना चांडक, सचिव सौ. शीतल राठी, कार्यकारी अध्यक्षा सौ. रजनी राठी, सचिव सौ. चेतना चांडक, संयोजक सौ. शीतल बुब एवं डॉ. ज्योति भूतड़ा उपस्थित थीं।

इस स्पर्धा की विशेषता यह रही कि इसकी गूंज सुदूर ऑस्ट्रेलिया तक पहुंची। 'किलकारियों का क्षीण होता स्वर चिंतन एवं संकल्पÓ विषय पर राजकुमार जाजू ने परंपरा से हटकर प्रत्येक परिच्छेद को मौलिक शीर्षक देकर समाज की जनसांख्यिकीय चिंता को प्रभावशाली ढंग से शब्दों में उकेरा। निर्णायक मंडल ने उनकी मौलिकता, चिंतन की गहराई एवं प्रभावी लेखन को सराहते हुए उन्हें प्रथम पुरस्कार के रूप में 7,001 नगद, स्मृति चिह्न एवं सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

सम्मान ग्रहण करने के बाद अपने विचार व्यक्त करते हुए राजकुमार जाजू ने कहा, यह पुरस्कार केवल मेरे लेखन का नहीं, एक सामूहिक चिंता का है। किसी भी सभ्यता की सांसें उसकी नई पीढ़ी में बसती हैं। किलकारी ही वह संगीत है, जिससे संस्कृति जीवित रहती है। जब आंगन मौन हो जाते हैं तो इतिहास भी मौन हो जाता है। आज हमें करियर की वेदी पर विवाह को और अपेक्षाओं की बलिवेदी पर रिश्तों को नहीं चढ़ाना है। समय आ गया है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें और परिवार को पुन: समाज की धुरी बनाएं।

उल्लेखनीय है कि राजकुमार जाजू के नाम अब तक स्लोगन, नाट्य लेखन, पत्र लेखन, वाद-विवाद, परिसंवाद जैसी विभिन्न विधाओं में 75 से अधिक जिला, विदर्भ, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तरीय पुरस्कार दर्ज हैं। प्रत्येक स्पर्धा का विषय भिन्न रहा है, लेकिन सेवा और समाज के प्रति समर्पण का भाव सदैव एक रहा है।

कार्यक्रम का शुभारंभ सेवा मंच के अध्यक्ष श्री सुनील मंत्री की प्रस्तावना से हुआ। संचालन सौ. संगीता राठी ने कुशलतापूर्वक किया तथा आभार ज्ञापन श्री संजय भुतड़ा ने किया। कार्यक्रम में शहर के सैकड़ों प्रतिष्ठित नागरिक एवं विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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