भूतड़ा सती माता धाम का प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 20 अगस्त को, देशभर के भूतड़ा समाज में उत्साह
राजस्थान के नागौर जिले के राजोद, रेन और बुटाटी गांवों के मध्य स्थित भूतड़ा सती माता धाम में नव निर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य महोत्सव 20 अगस्त 2026 (गुरुवार) को आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से भूतड़ा समाज के हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार, देवास निवासी श्री राजकुमार भूतड़ा ने वर्षों पूर्व राजोद स्थित सती माता की शिला एवं छोटे चबूतरे को भव्य मंदिर का स्वरूप देने का संकल्प लिया था। इस दिशा में अखिल भारतीय स्तर पर समाज के लोगों के सहयोग से मंदिर निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ, जो अब पूर्णता की ओर है।
पूर्व सचिव श्री ओमप्रकाश भूतड़ा एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती विजयलक्ष्मी भूतड़ा ने वर्ष 2018 में राजोद, बुटाटी, चकढाणी, रेन तथा आसपास के गांवों में जाकर ऐतिहासिक जानकारी एकत्रित की तथा सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस धाम के इतिहास को लोगों तक पहुंचाया। शोध के दौरान यह जानकारी सामने आई कि श्रीमती हीरादे भूतड़ा, धर्मपत्नी श्री हिरा भूतड़ा एवं पुत्रवधू श्री शेषा भूतड़ा, माघ शुक्ल त्रयोदशी, 17 जनवरी 1616 (रविवार) को राजोद, रेन और बुटाटी के मध्य सती हुई थीं। उनके सम्मान में तत्कालीन शासक राजा रावमाल जी द्वारा मूर्तिस्तंभ एवं चबूतरे का निर्माण कराया गया था।
समय के साथ मूर्तिस्तंभ नदी में गिर गया, किंतु वर्षों बाद खेड़ूली निवासी एक भूतड़ा परिवार को दृष्टांत होने पर उसे पुन: स्थापित किया गया। इसके बाद से यहां अनेक चमत्कारों की जनश्रुतियां प्रचलित रहीं और भव्य मंदिर निर्माण की भावना समाज में निरंतर प्रबल होती गई।
कुछ समय पूर्व इचलकरंजी निवासी श्री राजाराम भूतड़ा ने भी इस अभियान से जुड़कर मंदिर निर्माण का संकल्प लिया। इसके पश्चात 12 मार्च 2026 को अखिल भारतीय भूतड़ा समिति के अध्यक्ष श्री सुरेश भूतड़ा एवं सचिव श्री राजेंद्र भूतड़ा से चर्चा कर मंदिर निर्माण अभियान को गति दी गई। रेन निवासी श्री सुनील भूतड़ा के सहयोग से निर्माण कार्य आगे बढ़ा तथा देशभर के भूतड़ा परिवारों से ऑनलाइन माध्यम से आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ।
प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर देशभर से समाजजनों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर सती माता के दर्शन करने तथा इस ऐतिहासिक एवं आस्था के केंद्र के निर्माण में आर्थिक सहयोग प्रदान करने का आह्वान किया गया है। आयोजकों का विश्वास है कि यह धाम भविष्य में भूतड़ा समाज की आस्था, एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र बनेगा।
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