रांची माहेश्वरी समाज के 42 वीं चौपाल में गीता का पंचामृत को आत्मसात किया गया
5 जून 2022 पर्यावरण दिवस पर रांची माहेश्वरी समाज के वरिष्ठ पुरुष सदस्यों के मंच चौपाल का गठन किया गया था। प्रत्येक महीने नियमित रूप से इसके सदस्य आपस में मिलते हैं। वरिष्ठजनों के एकाकीपन, जीवन की निरसता को दूर कर उनके जीवन में जीवंतता लाने के उद्देश्य से गठित इस मंच में मनोरंजन, चिंतन मनन, अध्यात्म, खेलकूद, तीर्थाटन, छोटी-छोटी आउटिंग, चर्चा परिचर्चा, समाज के संगठन के प्रति समर्पण, सहयोग एवं सेवा की भावना से संबंधित कार्यक्रम होते हैं। अन्य समाज में भी समाज के इस चौपाल को आदर पूर्वक देखा जाता है एवं इसके कार्यक्रमों की सराहना होती है।
16 नवंबर को आयोजित 42 वीं चौपाल में चिन्मय मिशन के समर्पित साधक श्री श्याम टोरका, श्री वेद प्रकाश बागला, श्री विजय सराइका, श्री राजेश कौशिक एवं श्री सतीश गुप्ता की स्नेहमयी विशेष उपस्थिति रही। श्री वेद प्रकाश बागला ने गीता का पंचामृत यानी पांच श्लोकों में समस्त गीता का सार पर बहुत ही सरल शब्दों में प्रकाश डाला। उन्होंने निवेदन किया कम से कम इन पांच श्लोकों का नियमित पाठ करें। सनातन में शास्त्र एवं शस्त्र दोनों का महत्व है। रांची माहेश्वरी समाज ने सामूहिक शस्त्र पूजा का आयोजन 2024 विजयदशमी से ही प्रारंभ कर दिया है। अब शास्त्र गीता के सार को आत्मसात करने के कार्यक्रम को प्रारंभ किया गया है।
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