इचलकरंजी में 'वैचारिक मतभेदों की परिणिति संबंध विच्छेद तक' विषय पर विचार मंथन प्रतियोगिता का आयोजन सम्पन्न

महेश नवमी महोत्सव के अंतर्गत विचार मंथन प्रतियोगिता में वर्तमान समय में हो रहे संबंध विच्छेद जैसी  सामाजिक समस्या पर चर्चा हुई जिसमें कुल 12 प्रतियोगियों ने अपने सटीक विचार प्रकट करते हुए कहा कि मतभेदों की परिणीति आखिर संबंध विच्छेद तक क्यों हो जाती है, इसके कारण निवारण तथा सामाजिक उपाय आदि के बारे में विस्तार से अपनी बात रखी।

प्रतियोगिता में प्रथम स्थान विजेता अखिल बाहेती ने मतभेदों को मनभेद तक नहीं पहुंचने के बारे में सजग रहने पर जोर दिया तथा हमें आपसी संवाद बनाए रखते हुए किसी विषय पर असहमति होने पर भी एक दूसरे को सम्मान देते रहना चाहिए और  साथ-साथ एक दूसरे की बात सुनने की आदत भी अपनानी होगी, ताकि समय रहते हम अपने विरोधाभास दूर कर सके।

द्वितीय स्थान पर रहे द्वारकाधीश चांडक ने संस्कार से ही व्यक्तित्व निर्माण होना तथा आपसी सामंजस्य को बनाए रखने पर अपना फोकस किया, अच्छी संगत में रहने और सुसंवाद की बदौलत हम संबंध विच्छेद के दुष्परिणामों से बच सकते हैं।

तृतीय स्थान के विजेता अक्षय जाखोटिया ने उच्चतम अपेक्षाओं के चलते आपसी विश्वास एवं प्रतिबद्धता में कमी को संबंध विच्छेद का मुख्य कारण बताया एवं कमियां ढूंढने के बजाय अच्छाइयों पर ध्यान देने पर ही हम संबंधों को मजबूत बनाए रख सकते है..।

दिवेश तापडिय़ा ने राम और रावण के प्रसंग के आधार पर रिश्तो की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए एक दूसरे की गलती पर माफी मांगने तथा झुकने की प्रवृति को आत्मसात करने पर जोर दिया। उषा जाजू ने वसुदेव कुटुंबकम की धारणा मे कमी एवं युवा पीढी पर बड़ों का कंट्रोल कम हो जाने को संबंध विच्छेद का मुख्य कारण बताया। स्त्री-पुरुष, बहु-बेटी आदि सभी रिश्तों में समान अधिकार देकर हम इस समस्या का निराकरण कर पाएंगे।

वर्षा तोषनीवाल ने कहा कि विचारों का भिन्न होना स्वाभाविक है परंतु संवाद हीनता की बदौलत मतभेद और फिर मनभेद की परिणीति संबंध विच्छेद में होती जा रही है, समय के नियोजन के अभाव में इस प्रकार की परिस्थितियां बनती जा रही है।

नरेश काबरा ने संबंध विच्छेद के मुख्य कारणो में कम्युनिकेशन गैप, आधी अधूरी सूचना और हमारा सोशल मीडिया के प्रभाव में आने को बताते हुए कहा कि हमें सामने वाले व्यक्ति से बात करने में संकोच नहीं करना चाहिए, बात करते रहने से हर समस्या का समाधान होता है।

वरुण कांकानी ने त्याग की भावना को आत्मसात करने की भावना पर जोर देते हुए कहा कि परमात्मा ने हमें सोचने की शक्ति दी है तो हमें सहिष्णुता एवं धैर्य के साथ मतभेदों को समाप्त करना होगा।

अजय करवा ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जीवनी के आधार पर बताया कि पति पत्नि के अलग अलग उद्देश्यों के चलते भी मतभेद के उत्पन्न होने का मुख्य कारण है तथा परिवार में बड़ों को छोटों के प्रति त्याग एवं एक दूसरे का सम्मान देने की आवश्यकता पर बल दिया।

श्वेता हेडा ने  कहा कि 16 संस्कारो के महत्त्व, माता-पिता की भूमिका तथा आपसी एडजस्टमेंट की बदौलत ही हम संबंध विच्छेद को रोक सकते हैं समाज का खौफ कम हो जाने के कारण तथा एक दूसरे के प्रति आदर में कमी को संबंध विच्छेद का मुख्य कारण बताया तेजस जाखोटिया ने शादी की बढ़ती उम्र के कारण आपसी समन्वय में कमी आ जाने को भी संबंध विच्छेद का एक मुख्य कारण बताया तथा परिवार में धार्मिक त्यौंहार एक सामाजिक पर्व पर सब साथ में रहकर ष्द्गद्यद्गड्ढह्म्ड्डह्लद्ग करते रहने से पारिवारिक सौहार्द को हमेशा अच्छा बनाए रख सकते हैं, दीपा करवा ने आपसी मतभेदों को मिटाने हेतु मौन रूपी दीवार को तोडऩे तथा प्रेम, सद्भाव, सहिष्णुता तथा आदि गुणों बदौलत हम संबंध विच्छेद जैसी सामाजिक समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

सारांश

हमें एक दूसरे की बात सुनते रहने की आदत बनानी चाहिए। कोई भी मतभेद हो हमें आपस में बात करते रहना चाहिए, पॉजिटिव बात से मतभेद समाप्त हो सकते हैं। विचारों में असहमति भी हो, तो भी एक दूसरे को सम्मान देते रहना चाहिए मेरे ही विचार सही है यह ईगो नहीं रखना चाहिए। किसी भी बात की त्वरित प्रतिक्रिया से बचना चाहिए, 80 प्रतिशत सुनना चाहिए तथा 20 प्रतिशत ही बोलना चाहिए। वैचारिक मतभेद एक स्वाभाविक प्रक्रिया है इसे मनभेद तथा संबंध विच्छेद की परिणिति तक जाने से पहले ही त्याग, समर्पण, क्षमा, धैर्य, सहिष्णुता आदि संस्कारों की बदौलत हम निश्चित रूप से हम पारिवारिक सौहार्द की और बढ़ पाएंगे एवं इस बड़ी सामाजिक समस्या से निजात पाने में सफल होंगे।

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