माहेश्वरी महिला समिति बीकानेर द्वारा तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का हुआ भव्य आयोजन

श्री माहेश्वरी महिला समिति, बीकानेर के तत्वाधान में प्रथम बार माहेश्वरी समिति महिलाओं द्वारा संयुक्त रूप से दिनांक 3, 4, 5 मई 2024 को स्थानीय डागा चौक स्थित महेश भवन में तीन दिवसीय भक्त कथा ''नानी बाई का मायरा'' का आयोजन किया गया। प्रेस-नोट जारी करते हुए माहेश्वरी समाज बीकानेर मीडिया प्रभारी पवन राठी के अनुसार माहेश्वरी महिला समिति वैसे तो हमेशा किसी न किसी प्रकार की सामाजिक, धार्मिक, पर्यावरण तथा जनकल्याणी कार्यों में सदैव अग्रणीय रहती है लेकिन प्रथम बार इस प्रकार के तीन दिवसीय आयोजन कर बीकानेर इतिहास में माहेश्वरी महिला समिति के स्थान को ओर अधिक गौरवमयी व यादगार बना दिया।
धार्मिक आयोजन कार्यक्रम सम्बन्धी विस्तृत जानकारी देते हुए मीडिया समिति की सदस्या रेखा लोहिया ने बताया कि तीन दिवसीय ''नानी बाई रो मायरो'' कथा से पूर्व दिनांक 2 मई को स्थानीय बी.के. स्कूल, हनुमान मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों सहित युवक-युवतियाँ भी अपने सिर पर कलश व नारियल के साथ कथा स्थल महेश भवन पहुंचे। कलश यात्रा में जहां एक ओर रथ पर कथा वाचक पं. गिरीराज जी जोशी विराजमान थे, वही बैण्ड की धुन पर महिलाऐं संकीर्तन कर रही थी।
कथा समिति से जुड़ी महिला समिति सदस्या सचिव चन्द्रकला कोठारी एवं अंजली झंवर ने संयुक्त रूप से बताया कि तीन दिवसीय कथा में तीनों दिन जहां अलग-अलग यजमानों ने कथा पूर्व सपत्नी पूजा-अर्चना की वहीं तीनों दिन अलग-अलग मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे अतिथि श्रीमती शालिनी बजाज (सीओ), गंगाशहर, बीकानेर, श्री जेठानन्द व्यास (विधायक बीकानेर पश्चिम) तथा महेश भवन के सभी ट्रस्टीगणों का भी व्यासपीठ व महिला समिति की ओर से सम्मान करते हुए आभार व्यक्त किया गया।
समिति सदस्या अध्यक्षा मंजू दम्माणी ने बताया कि तीनों दिवसीय आयोजित कथा का समय दोपहर 1 बजे से 5 बजे तक था। कथावाचक व्यासपीठ पं. गिरीराज जी जोशी ने कथा का वाचन मधुर एवं सरल भाषा में करते हुए सम्पूर्ण कथास्थल को भक्तिमय वातावरण से परिपूर्ण कर दिया। प्रत्येक दिन की कथा का वाचन करते हुए प्रसंग अनुसार संचेतन झांकियां निकाली गई जिसे देखकर सभी उपस्थित भक्तगण भाव-विभोर हो गए। कथा प्रसंग के दौरान करमाबाई, मीराबाई, भक्त नरसी मेहता, नानी बाई, द्वारकाधीश आदि झांकियों का प्रमुखता से चित्रण किया गया।
संरक्षिका सरला लोहिया ने बताया कि कथा के अंतिम दिवस की कथा का वाचन करते हुए जैसे ही पं. गिरीराज जोशी ने भगवान द्वारा 56 करोड़ के मायरे की कथा सुनाई, उसके पश्चात् सम्पूर्ण महिला समिति सदस्यों ने सामुहिक रूप से 56 करोड़ के मायरे को भरने की रस्म अदा की। मायरे का उत्सव बड़े ही धुमधाम से संकीर्तन व नृत्य के साथ मनाया गया।
कथा स्थल पर तीनों दिवसीय उपस्थित सभी अतिथियों ने जहां एक ओर महिला समिति द्वारा तीन दिवसीय ''नानी बाई रो मायरोÓÓ की कथा का प्रथम सामुहिक प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की, वही इस अविस्मरणीय कथा रस सबके हृदय पटल पर एक सकारात्मक प्रभाव छोडऩे की बात की और आज के समय वर्तमान में इसकी आवश्यकता का महत्त्व भी बताया।
महिला समिति वरिष्ठ सदस्या सुशीला बाई डागा ने बताया कि प्रत्येक दिन की कथा विश्राम के पश्चात् सदैव सामुहिक आरती की जाती थी और उपस्थित सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया जाता था। कथा स्थल पर समिति सदस्याओं के अलावा आस-पास के मौहल्लों से भी महिलाऐं, पुरुष भक्त पहुंचकर कथा का रस्सावादन का आनन्द प्राप्त करते।
कथा के अन्तिम दिवस समिति संरक्षिका श्रीमती किरण झंवर ने जहां एक ओर से समिति की सभी सदस्याओं की ओर से व्यासपीठ कथावाचक पं. गिरीराज जोशी का सम्मान किया वही महिला समिति की सभी सदस्याओं द्वारा तन-मन-धन तथा सभी प्रकार की व्यवस्थाओं में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से दिये गए सभी सहयोगियों का विशेष रूप से महेश भवन के ट्रस्टीगणों का आभार व्यक्त किया।
श्रीमती रेखा लोहिया ने बताया कि जहां एक ओर तीन दिवसीय कथा में समिति कार्यकारिणी सभी सदस्याऐं उपस्थित थी, इसके अलावा मुख्य रूप से मूलचन्द राठी, मनमोहन लोहिया, मदन डागा, कैलाश लखोटिया, देवकिशन लोहिया, विमल दम्माणी आदि के अलावा प्रदेशाध्यक्ष निशा झंवर व जिलाध्यक्ष कंचन राठी भी उपस्थित थे।
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